क्या दारू से सरकार चल रही है?

मदिरा, दारू, शराब, Alcohol जिसे बर्बादी का रास्ता समझा जाता है, क्या यह दारू ही देश के Economy में अहम् भूमिका निभा रहा है, क्या दारू पीने वाले कि लड़खड़ती कदम ही देश कि Economy को सहारा दिए हुए हैं । दोस्तों राज्य को तीसरे सबसे अधिक राजस्व देने वाला विषय है शराब, तो आइये दोस्तों इस लेख के माध्यम से विस्तार से समझते है शराब का इकोनॉमि में क्या योगदान हैं ।

दोस्तों शराब का Globel Market 1400 billion का, और यह हर साल 11% के दर से बढ़ता ही जा रहा है, इस Globel Market में सबसे तेजी से बढ़ता देश भारत है वर्त्तमान में भारत में यह 52.5 billion का Market है, और भारत भी लगभग 8% के दर से साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है, MOFPI- Ministry of Food Processing Industries, के अनुसार पिछले कुछ सालों में Alcohol का प्रोडक्शन 25 % तक बढ़ चुका है।

यह Industree लगभग 15 लाख लोगो को रोज़गार भी प्रदान करती है।

Industry estimates के अनुसार 2005 me 21 करोड़ भारतीय शराब पीते थे वहीं 2019 के डाटा अनुसार शराब पीने वालों कि संख्या 29 करोड़ पहुंच चुका है।

अब तक देखा गया है कि, शराब की खपत में मिडिल क्लास और अपर क्लास की संख्या अधिक थी लेकिन आने वाले 10 साल में देखा गया है, कि शराब की खपत में मिडिल क्लास और लोअर क्लास की संख्या अधिक होगी।

औसतन भारत में प्रति व्यक्ति 5.7 लीटर शराब का खपत करता है।

पिछले 1 साल में यदि सभी राज्यों के शराब से मिलने वाले राजस्व कुल 175000 करोड़ होता है।

एक सर्वे के अनुसार 33% पुरुष और 25% महिला कभी ना कभी शराब का सेवन अवश्य करते है, और इनमे से काफ़ी लोग रेगुलर होते जा रहें हैं

सरकार शराब के ठेके क्यों खोलते हैं?

जैसे कि पहले ही बताया गया है कि, राज्य सरकार के आय का तीसरा बड़ा श्रोत है, शराब
सबसे पहला आय का साधन GST है और दूसरा है पेट्रोल।

शराब से सर्वाधिक राजस्व प्राप्त करने वाले राज्य
उत्तर प्रदेश -31517 करोड़ प्रति वर्ष
कर्नाटक- 20950 करोड़ प्रति वर्ष
महाराष्ट्र- 17477 प्रति वर्ष
मध्य प्रदेश -13000 प्रति वर्ष

ऐसे ही यदि सभी राज्यों का आय को जोड़ दिया जाए तो यह होगा 175000 करोड़।

यह तो वह है जो लीगल तरीके से बिकते व बनाये जाते हैं, बांकी अवैद का जोड़ दिया जाये तो अंदाजा भी नहीं लगया जा सकता।

कई छोटे राज्य ऐसे भी हैं जहां शराब से मिलने वाले आए ही उनके लिए मुख्य आय के स्रोत हो जाते हैं, जैसे
मिजोरम के कुल राजस्व का 58% शराब से ही आता है,
और ऐसे है कुछ अन्य राज्यों का हाल कुछ इस प्रकार हैं
पोंडिचेरी -55%
मेघालय- 47%
तेलंगाना – 31%

शराब से सबसे कम राजस्व प्राप्त करने वाले राज्य
बिहार – शराब बंदी के कारण
गुजरात -0.20%
मणिपुर -7%
असम -8%
गोवा -9%

बिहार ने जब से शराब बंदी किया है, तब से हर साल उसे 3500 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है और वहां की सरकार इस नुकसान की भरपाई करने हेतु राजस्व के कुछ अन्य साधन तलाश कर रही है लेकिन अब तक कोई अन्य साधन मिल नहीं पाया है, किंतु भारत के कुल शराब से आने वाले राजस्व में कोई फर्क नहीं पड़ा है क्योंकि बिहार के पड़ोसी राज्य में शराब की खपत बढ़ गई है, जैसे यूपी में 3000 करोड़ क्या राजस्व बड़ा है, और वही पश्चिम बंगाल में लगभग 800 करोड़ का राजस्व में वृद्धि हुई है, इससे यह पता चलता है कि बिहार ने खुद तो शराबबंदी करके अपना नुकसान करा बैठे और राजस्व के अन्य साधन को ढूंढ नहीं पाए, लेकिन बिहार के लोगों ने शराब पीने के लिए दूसरा ठिकाना ढूंढ लिया है।

दोस्तों शराब का अत्यधिक सेवन सभी के लिए हानिकारक है इस लिए सरकार को राजस्व के अन्य साधनों का तलास करना चाहिए, शराब के भरोसे रहना ठीक नहीं होगा।

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